लोग कहलन कि हमरे चाल में खराबी हौ,
सच इ बा कि तोहरे गाँव के हवा शराबी हौ।
गुलाबो दुबक जाला कवनो कोना-अंतरा में,
तोहरे गाल के रंगत त अइसन गुलाबी हौ।
तोहरे हँसी से खिल जाला हमार जिनगी,
जइसे बंजर धरती पर बरखा नवाबी हौ।
तोहरा--हमरा पर जे लोग उठावेला उंगली,
सच कहा त ओनहीं में असली खराबी हौ।
तोहरे बातन में मिठास त बहुत बा लेकिन,
कबहूँ-कबहूँ लागेला थोड़ा हिसाबी हौ।
तोहरे हँसी से खिल उठेला जिनगी के मौसम,
छँट गइल अन्हेरा काहे कि रात महताबी हौ।
हम खामोश बानी त आउर कुछ ना समझs,
हमार चुप्पी तोहरे नाम चिट्ठी जवाबी हौ।
तोहरे संगे बितावल हर इक लम्हा लागे,
जइसे किस्सा पुरान, मगर
लाजवाबी हौ।
‘वर्मा’ दिल के बात कागज पर उतार देला,
सच कहीं त एहमें ओकरे कामयाबी हौ।

18 टिप्पणियां:
wah!
Thanks 😊
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 11 मई, 2026
को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
शुक्रिया
बहुत खूब वर्मा जी.
बहुतै सरस !
सुंदर
सुंदर सृजन !
👌🌹
आभार आपका 😃
😃
Thanks 😊
Thanks 😊
❤️
वाह
शुक्रिया 😃
बहुत सुंदर रचना
हार्दिक आभार 😃
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