शुक्रवार, 8 मई 2026

हवा शराबी हौ (भोजपुरी गज़ल)

लोग कहलन कि हमरे चाल में खराबी हौ,
सच इ बा कि तोहरे गाँव के हवा शराबी हौ।

गुलाबो दुबक जाला कवनो कोना-अंतरा में,
तोहरे गाल के रंगत त अइसन गुलाबी हौ।

तोहरे हँसी से खिल जाला हमार जिनगी,
जइसे बंजर धरती पर बरखा नवाबी हौ।

तोहरा--हमरा पर जे लोग उठावेला उंगली,
सच कहा त ओनहीं में असली खराबी हौ।

तोहरे बातन में मिठास त बहुत बा लेकिन,
कबहूँ-कबहूँ लागेला थोड़ा हिसाबी हौ।

तोहरे हँसी से खिल उठेला जिनगी के मौसम,
छँट गइल अन्हेरा काहे कि रात महताबी हौ।

हम खामोश बानी त आउर कुछ ना समझs,
हमार चुप्पी तोहरे नाम चिट्ठी जवाबी हौ।

तोहरे संगे बितावल हर इक लम्हा लागे,
जइसे किस्सा पुरान, मगर लाजवाबी हौ।

वर्मादिल के बात कागज पर उतार देला,
सच कहीं त एहमें ओकरे कामयाबी हौ।

18 टिप्‍पणियां:

Aman Peace ने कहा…

wah!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Digvijay Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 11 मई, 2026
को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

बहुत खूब वर्मा जी.

Priyahindivibe | Priyanka Pal ने कहा…

बहुतै सरस !

Anita ने कहा…

सुंदर

शुभा ने कहा…

सुंदर सृजन !

Razia Kazmi ने कहा…

👌🌹

M VERMA ने कहा…

आभार आपका 😃

M VERMA ने कहा…

😃

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

M VERMA ने कहा…

❤️

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया 😃

हरीश कुमार ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

M VERMA ने कहा…

हार्दिक आभार 😃