मैं अपनी माशूका से
सोमवार को आँखें चार करता हूँ,
फुर्सत से मंगलवार के दिन
प्यार का इज़हार करता हूँ।
बुधवार बीत जाता
घूमने-फिरने और डेटिंग में,
और बृहस्पतिवार निकल जाता है
थोड़ी-सी मनुहार और वेटिंग
में।
शुक्रवार को फिर
शादी और हनीमून का जुनून,
शनिवार आते-आते
छोटी-सी अनबन का सुकून।
रविवार को होता है
थोड़ा-सा ब्रेकअप, थोड़ा मौन,
फिर दिल कहता है—
चलो, रीस्टार्ट करो ये लव-ज़ोन।
और फिर…
मैं अपनी उसी माशूका से
सोमवार को आँखें चार करता
हूँ।
सबसे बड़ी बात—
ये माशूका कोई और नहीं,
मेरी पत्नी ही है!
जिसके साथ
पिछले चार दशकों से
हर हफ्ते
हम अपने वैवाहिक जीवन का
इसी तरह
नवीनीकरण करते आ रहे हैं।

9 टिप्पणियां:
आपने शादीशुदा रिश्ते को इतना हल्का-फुल्का और ज़िंदा तरीके से दिखाया कि पढ़ते-पढ़ते मुस्कान आ गई। हर दिन का ये छोटा-सा रोमांस और नोकझोंक रिश्ते को बोर नहीं होने देता, बल्कि उसे नया बनाता रहता है।
मुस्कुराए आप मकसद सफल हुआ
शुक्रिया
सुंदर अभिव्यक्ति सर।
सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ३१ मार्च २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
शुक्रिया
वाह
सुकून और मौन के लिए शनिवार और रविवार की प्रतीक्षा !! यह भी खूब रही
शुक्रिया
धन्यवाद
हक़ीक़त में आप दोनों भाग्यशाली हैं
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