शनिवार, 14 मार्च 2026

तालियों से सच बदलता नहीं ---


दर्द के गाँव में ठहर कर देखिये
मौत से पहले ही मर कर देखिये

 

भूख की आँखों में जलते प्रश्न हैं,
उनसे आँखें आप भर कर देखिये

 

तालियों से सच बदलता ही नहीं,
आईनों से भी गुज़र कर देखिये

 

रात कितनी भी सियाही ओढ़ ले,
एक दीया फिर भी धर कर देखिये

 

सिंहासन काँपेगा इक दिन यक़ीनन,
जनता में जाकर उतर कर देखिये

 

वर्मासच बोल दे तो चुभेगा ज़रूर,

कलेजे पे पत्थर को धर कर तो देखिये

12 टिप्‍पणियां:

Aman Peace ने कहा…

Wah!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Anita ने कहा…

बेहतरीन शायरी

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

Shalini kaushik ने कहा…

सुन्दर भाव संजोये हुए अभिव्यक्ति

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

शुभा ने कहा…

बहुत खूब!!

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

MANOJ KAYAL ने कहा…

सुन्दर रचना

M VERMA ने कहा…

Thanks