बुधवार, 11 मार्च 2026

हुनर का नया व्याकरण

एक मछली थी—
उसे तैरना नहीं आता था।
वह धारा के साथ
बस बह रही थी।

धूप पड़ी,
लहरें चमकीं—
और उसकी लाचारी
प्रतिभा घोषित हो गई।

भीड़ ने कहा—
“देखो, कैसी तैराक है!”

कुछ तथाकथित विद्वानों ने
उसके बहाव को
नया सिद्धांत बताया।

एक समिति बैठी—
और उसे
राष्ट्रीय तैराक घोषित कर दिया।

फिर एक दिन
धारा रुक गई।
मछली भी रुक गई।

तब पता चला—
वह तैर नहीं रही थी,
बस बह रही थी।

दरअसल
इस देश में
बहाव के साथ बहना ही
सबसे बड़ा हुनर है।

और जो सचमुच
तैरना जानते हैं,
और छद्म तैराकी के खिलाफ
आवाज़ उठाते हैं—

वे अक्सर
खतरनाक
और अपराधी
घोषित कर दिए जाते हैं।

14 टिप्‍पणियां:

Razia Kazmi ने कहा…

बहुत ही शानदार बात कही

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Digvijay Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 12 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

Anita ने कहा…

कभी तो बहाव रुकेगा फिर आगे निकल जाएँगे असली तैराक

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

M VERMA ने कहा…

यकीनन
इन्तेज़ार है उसी दिन का

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

Meena Bhardwaj ने कहा…

सुन्दर सृजन ।

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

बारीक तंज, बधाई।

M VERMA ने कहा…

शुक्रिया

Aman Peace ने कहा…

Wah!!

M VERMA ने कहा…

Thanks 😊