संस्कारित-सभ्यों के बीच आदमखोर कबीले क्यूं हैं ?
“रोज डे” के दिन
मैने उसे
सुर्ख गुलाब दिया
उसने हाथ बढाया
और गुलाब हाथ में लिया
गुलाब देने और लेने के
इस प्रक्रम में अनायास
उंगलिया स्पर्शित हो गई
गुलाब तो लाल ही रहा
पर हम दोनो
गुलाबी हो गए.
एहसास से परिपूर्ण अभिव्यक्ति।सादर।____नमस्ते,आपकी लिखी रचना मंगलवार १० फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी हैपांच लिंकों का आनंद पर...आप भी सादर आमंत्रित हैं।सादरधन्यवाद।
Thanks
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2 टिप्पणियां:
एहसास से परिपूर्ण अभिव्यक्ति।
सादर।
____
नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार १० फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
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