बुधवार, 23 मई 2012

छत्तीस का आकड़ा है ….

छत्तीस का आकड़ा है
क़दमों में पर पड़ा है
.
आंसुओं को छुपा लेगा
जी का बहुत कड़ा है
.
उंगलियां उठें तो कैसे?
कद उनका बहुत बड़ा है
.
लहुलुहान तो होगा ही 
पत्थरों से वह लड़ा है
.
कब का मर चुका है
वह जो सामने खड़ा है
.
खाद बना पाया खुद को 
महीनों तक जब सड़ा है
.
कल सर उठाएगा बीज
आज धरती में जो गड़ा है

34 टिप्‍पणियां:

  1. लहुलुहान तो होगा ही

    पत्थरों से वह लड़ा है

    सुंदर ...अभिव्यक्ति ....

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  2. वाह सर वाह..............

    छोटे बहर की बेहद खूबसूरत गज़ल......

    सादर.

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  3. उंगलियां उठें तो कैसे?
    कद उनका बहुत बड़ा है ,,,,,,

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,,,,बेहतरीन रचना,,,,,

    MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि,,,,,सुनहरा कल,,,,,

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    मंगलवार, 22 मई 2012
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  5. कल सर उठाएगा बीज

    आज धरती में गड़ा है

    बहुत बढ़िया , बेहतर !

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  6. लहुलुहान तो होगा ही

    पत्थरों से वह लड़ा है
    बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  7. इस छोटी बहर में तूफ़ान की तरह उमड़ते भावों कों समेटना जोखिम भरा काम है और आपने इसे बाखूबी किया है ... लाजवाब गज़ल ...

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  8. वाह ...बहुत ही बढिया प्रस्‍तुति।

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  9. उंगलियां उठें तो कैसे?
    कद उनका बहुत बड़ा है

    जबरदस्त प्रभावशाली ....
    बधाई वर्मा जी !

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  10. बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने. वाह..

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  11. खाद बना पाया खुद को

    महीनों तक जब सड़ा है

    वाह, इस खूबसूरत गज़ल का एक एक शेर बेहतरीन ।

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  12. उंगलियां उठें तो कैसे?
    कद उनका बहुत बड़ा है

    लहुलुहान तो होगा ही

    पत्थरों से वह लड़ा है

    कल सर उठाएगा बीज
    आज धरती में गड़ा है

    bahut sundar evam prabhavshali rachna... in panktiyon ki kavyatmakta to bas adbhut hai...

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  13. उंगलियां उठें तो कैसे?
    कद उनका बहुत बड़ा है

    कितनी सही बात।
    शानदार ग़ज़ल।

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  14. कल सर उठाएगा बीज

    आज धरती में गड़ा है

    ...यही जीवन का सहारा है...बेहतरीन गज़ल...

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  15. जीवन का सत्य ......
    कल सर उठाएगा बीज
    आज धरती में गड़ा है

    बहुत खूब !
    शुभकामनाएँ!

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  16. इस गज़ल से तो 63 का आंकड़ा हो गया।:)

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  17. बहुत खूब सर
    छोटी बहर में इतना कुछ

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  18. बहुत ही सुन्दर रचना है..
    शानदार अभिव्यक्ति:-)

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  19. कमाल है भाई जी....
    शुभकामनायें आपको !

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  20. आंसुओं को छुपा लेगा

    जी का बहुत कड़ा है

    बहुत मजबूरियों को साथ लेकर चलता है यह . ..बहुत सुन्दर !

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  21. कल सर उठाएगा बीज

    आज धरती में गड़ा है


    बहुत सुंदर .....

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