बुधवार, 29 जुलाई 2009

पहलू में आग ---- !


*
खु़द के पहलू में आग रखा करो
शफ्फ़ाक़ वज़ूद है दाग़ रखा करो

बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
साथ अपने एक नाग रखा करो

धूप से दोस्ती कर ली तुमने तो
एहसासों में अपने बाग़ रखा करो

कोई और हिसाब क्यूँ रखेगा भला
खु़द अपना गुणा-भाग रखा करो

ज़ेहन की नसें फटें क्यूँ शोर से
शिराओं में भैरव राग रखा करो

*

39 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    साथ अपने एक नाग रखा करो
    बहुत सुन्दर शेर --- सभी शेर खूबसूरत
    भाव सुन्दर

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  2. रचना अच्छी बन पड़ी है वर्मा जी। नाग रखने वाली बहुत पसन्द आयी।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  3. बेहतरीन... दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ..
    शुभकामनायें.

    भुवन वेणु
    लूज़ शंटिंग

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  4. आपकी प्राह: स भी कवितायें पड़ डाली । अच्छा लिखते हैं आप । सभी भावः पूर्ण अभिव्यक्तियाँ है ,
    शुभकामनायें

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  5. बहुत ख़ूबसूरत रचना! आपकी हर एक रचना लाजवाब है!

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  6. बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति बधाई ।

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  7. कोई और हिसाब क्यूँ रखेगा भला
    खु़द अपना गुणा-भाग रखा करो

    बहुत सुन्दर शेर! शुभकामनायें!

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  8. बहुत खूब...जिंदगी की गहरी समझ दिखती है आपकी रचनाओं में

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  9. बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    साथ अपने एक नाग रखा करो
    वाह बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है बधाई

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  10. Kya kah diya? 'khudke pahloome aag rakha karo..!'

    Behad khoobsoorat ashar hain...!

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  11. वर्मा साहब,

    बहुत ही अच्ची गज़ल कही है। एक एक अशआर बेहतरीन। जाति तौर मुझे यह शे’र बहुत पसंद आया :-

    बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    साथ अपने एक नाग रखा करो

    कोई और हिसाब क्यूँ रखेगा भला
    खु़द अपना गुणा-भाग रखा करो


    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  12. बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    साथ अपने एक नाग रखा करो

    bahut khub kaha aapne ...

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  13. बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    साथ अपने एक नाग रखा करो
    Verma ji,
    kamal ka likhte hain aap..
    har sher lajawaab hai..
    bahut hi badhiya...
    badhai..

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  14. 'बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    साथ अपने एक नाग रखा करो'
    - सुन्दर और तीखा.इन शेरों को पढ़ कर दुष्यंत कुमार की रचनाओं की याद ताजा होती है.

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  15. Apka blog to beautiful hai.

    Happy Friendship day.....!! !!!!

    पाखी के ब्लॉग पर इस बार देखें महाकालेश्वर, उज्जैन में पाखी !!

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  16. बहुत ही उम्दा ,साधुवाद .तस्वीर भी बहुत कुछ बोल रही है ....

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  17. बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    साथ अपने एक नाग रखा करो

    नायाब रचना.

    रामराम.

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  18. बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    साथ अपने एक नाग रखा करो
    वाक़इ। सच कहते हो वर्मा साहब। बधाइ।

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  19. ठीक कहा.. अच्छा प्रयास है.. निरन्तरता बनाए रखें..

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  20. वर्माजी सशक्त रचना के लिए बधाई ,
    बहुत भरोसा मत करो ज़माने पर
    अपने साथ एक नाग रक्खा करो |
    आज के वक़्त पर सही व्यंग है |

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  21. धूप से दोस्ती कर ली तुमने तो
    एहसासों में अपने बाग़ रखा करो
    सुन्दर पंक्तियाँ....मन को छु गयी.,...

    regards

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  22. धूप से दोस्ती कर ली तुमने तो
    एहसासों में अपने बाग़ रखा करो

    इन खूबसूरत अशआरों के लिए
    मुबारकवाद।

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  23. धूप से दोस्ती कर ली तुमने तो
    एहसासों में अपने बाग़ रखा करो

    इन खूबसूरत अशआरों के लिए
    मुबारकवाद।

    जवाब देंहटाएं
  24. पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ, आपकी रचनाओं को पढ़कर लगा, इस ब्लॉग पर पहले बहुत पहले आ जाना चाहिए था, सभी रचनाएँ दिल को छु लेती हैं..आभार !

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  25. sir ji , main sirf kahunga .. jabardasht... badhai ..
    vijay

    pls read my new poem "झील" on my poem blog " http://poemsofvijay.blogspot.com

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