सोमवार, 8 जून 2009

नज़र से ही नज़र को पैगाम --!!











तुम आगाज़ लिखो, मैं अंजाम लिखूंगा
तुम्हारी देहरी पे आज सलाम लिखूंगा
.
परिंदे की तरह उड़ने की ख्वाहिश है
ख़त मैं आज बादलों के नाम लिखूंगा
.
पेशानी पर हाथ रखकर बैठो तो ज़रा
कलम बेचैन है, आज इक तूफ़ान लिखूंगा
.
हसरतों की मौत देखी है मैंने अब तक
हसरतें, अब ज़िंदगी तेरे नाम लिखूंगा
.
महज़ नज़र-ऐ-इनायत की आरजू है
नज़र से ही नज़र को पैगाम लिखूंगा
.
ख़त में तुम्हे अपना नाम न मिलेगा
तुम्हे गुल, तो कभी गुलफाम लिखूंगा


13 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है , बहुत बढ़िया , बेहतरीन ग़ज़ल पढने को मिली |

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  2. verma ji
    gajab ,,kam shabdo mai itni khoobsurati se piroya hai bhavo ko jaise kal-kal bahte pani ka pravah
    bandhai ek khoobsurat kalam ke liye
    aapki bechain kalam aise hi baichen rahe ..or hath rakhne vala koi aasna

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  3. नजर से ही नजर को पैगाम।
    बहुत खूबसूरती से दिया है अंजाम।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  4. हौसला आफज़ाई का शुक्रिया

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  5. verma ji , aapki kalam jaadoo dikhane lagi hai, umda gazalke liye badhai.

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  6. हसरतों की मौत देखी है मैंने अब तक,
    हसरतें, अब ज़िन्दगी के नाम लिखूंगा

    बहुत खुबसूरत ख्याल !!
    अच्छा लगा !!

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. अरे वो गल्ती से मिट गयी। फिर से लिखती हूँ-

    अच्छा लगा कि मिल-मिल के बात बन जाए
    तुम आगाज़ लिखो, मैं अंजाम लिखूंगा

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  9. वाह ! वाह ! वाह ! बेहतरीन ग़ज़ल....हर शेर लाजवाब...

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  10. maine aaj kai rachnao ko padha bahutkhoob likhate hai badhai|

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  11. maine aaj kai rachnao ko padha bahutkhoob likhate hai badhai|

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  12. Hi Raaz,

    Thank You Very Much for sharing this great post.

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    -Thanks for sharing

    - Pallavi Joshi

    Senior Account

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