शनिवार, 22 अगस्त 2026

अँधेरे का उजाला

 

शहर त्रस्त था
अँधेरों से।

उन्होंने
संविधान में संशोधन किया
और
अँधेरे का नाम
उजाला रख दिया।

फिर
मीडिया ने घोषित कर दिया—

अब शहर में
अँधेरा नहीं है,
सिर्फ़
उजाला दिखाई देता है।

15 टिप्‍पणियां:

  1. हक़ीक़त है जो मीडिया कहदे वही सही माना जा रहा है अपना सोचना सबने बंद कर दिया है

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  2. मीडिया सच भी दिखाता है, पर हम तब आँखें बंद कर लेते हैं

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    1. वहीं सच जो सत्ता द्वारा प्रायोजित होता है

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  3. बात ये है सर कि
    मनमुताबिक, सहूलियत से
    अंधेरे को उजाला घोषित करने वाला
    पक्ष-विपक्ष सबका अपना मीडिया है ,
    निर्भर करता है...
    आपकी ऑंखें कौन सा उजाला चुनती है।
    सादर
    -------

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    1. सही कहा
      पर अंधेरे को उजाला घोषित करने का प्रयास सत्ता करती है

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    2. मतलब कि सत्ता का विपक्ष प्रयासहीन है?
      सत्ता को कटघरे में खड़ा करना,सवाल करना , विरोध करना आपका मौलिक अधिकार है और सत्ता की हर पंक्ति को रेखांकित कर गलत ठहराना आपका कर्तव्य है न?

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 26 अगस्त 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।

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  5. और सबने मान भी लिया...
    फिर दोष किसका ?
    लाजवाब व्यंग

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