माना रेप हुआ है
पर घबराइए मत—
नगर के चरित्र पर
इससे कोई दाग़ नहीं पड़ता।
दाग़ तो कपड़ों पर लगते हैं
संस्थाओं पर नहीं।
यह रेप नहीं है
यह एक प्रक्रिया है
जो कभी-कभी
अनुशासन सिखाने के लिए
अपने आप घट जाती है।
अपराधी की तलाश व्यर्थ है
क्योंकि यहाँ
हर आदमी
सम्मानित है—
कोई पिता है
कोई पति
कोई संस्कारी मतदाता।
और सबसे बड़ी बात—
रेपिस्ट भी इसी सम्मानित समाज का अंग है।
औरत अगर टूटी है
तो इसका मतलब यह नहीं
कि किसी ने तोड़ा है
संभव है
वह पहले से ही
कमज़ोर थी।
कत्ल हुआ है—
हाँ, हुआ है
पर हत्या शब्द
बहुत असभ्य है
इसे यूँ कहिये—
जीवन की समयपूर्व
समाप्ति।
पोस्टमॉर्टम बताता है
चाक़ू मिला
पर हाथ नहीं मिला
गोली मिली
पर उँगली नहीं मिली
इसलिए
हत्यारा नहीं मिला।
वैसे भी
मरा हुआ आदमी
क्या साबित करेगा?
जो ज़िंदा हैं
उनकी गवाही ज़्यादा ज़रूरी है
और ज़िंदा वही है
जो चुप है।
न्यायालय की दीवारों पर
इंसाफ़ टंगा है
पर पहुँच से बाहर
ठीक सीसीटीवी की तरह—
सब देखता है
कुछ नहीं पकड़ता।
अख़बारों से अनुरोध है—
इसे सनसनी न बनाएँ
यह नगर
संवेदनशील नहीं
सुसंस्कृत है।
और अंत में
एक सर्वसम्मत निर्णय—
यह अपराध नहीं
यह एक आँकड़ा था
जो गलती से
इंसान बन गया।

उधेड़ती हुई रचना
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
धन्यवाद
हटाएंबहुत सुंदर रचना है. पीछे जा कर भी पढ़ना पड़ेगा.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंस्वागत है
कड़वे सच को लिखा है बाखूबी ...
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंWah!
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंसटीक
जवाब देंहटाएंजी आभार
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